अध्याय-2: उत्तराखण्ड का इतिहास (भाग-2: प्राचीन काल)

अध्याय-2: उत्तराखण्ड का इतिहास (भाग-2: प्राचीन काल )

प्रस्तावना –

उत्तराखण्ड का इतिहास भारत के सबसे प्राचीन और गौरवशाली इतिहासो मे से एक माना जाता है। यह केवल एक पर्वतीय राज्य नही बाल्क भारतीय सभ्यता, संस्कृति धर्म और आध्यात्मिक परम्परा का केन्द्र रहा है। उत्तराखण्ड का उल्लेख वेदों, पुराणो, रामायण, महाभारत तथा अनेक प्राचीन ग्रंथो मे मिलता है। यहाँ के पर्वत, नदियाँ, वन और तीर्थस्थल हजारो वर्षों से ऋषि-मुनियो की तपस्थली रही है। 7

इसी कारण उत्तराखण्ड को’ देवभूमि’ कहा जाता है। माना जाता है कि अनेक ऋषियो ने यहाँ तपस्या की और अनेक धार्मिक ग्रै थो की स्चना भी इसी क्षेत्र मे हुई। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे तीर्थ आज भी इस गौरवशाली परम्परा के प्रतीक है।

 

उत्तराखंड का प्राचीन नाम

प्राचीन समय में उत्तराखण्ड को आज के नाम से नहीं जाता था। विभिन्न धार्मिक ग्रंथो और पुराणो मे इसके अलग-अलग नाम मिलते है।

उत्तराखण्ड के नामः

केदारनाथ, मानसखण्ड, हिमवंत, उत्तरापथ, देवभूमि

Note – केदारखण्ड वर्तमान गढ़वाल क्षेत्र का

प्राचीन नाम था, जबकि मानसखण्ड वर्तमान कुमांऊ क्षेत्र का प्राचीन नाम माना जाता है।

वेदो और पुराणो मे उत्तराखण्ड .

उत्तराखण्ड का उल्लेख ऋग्वेद, यजुवेद, स्कन्द पुराण, महाभारत तथा अन्य पुराणो मे मिलता है।

स्कन्द पुराणो में केदारखण्ड और मानसखण्ड, का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमे हिमालय का महिमा, गंगा नदी, बद्रीनाथ। केदारनाथ तथा अनेक तीर्थों का वर्णन किया गया है।

रामायण काल मे उत्तराखण्ड

रामायण के अनुसार भगवान राम के वनवास काल में हिमालय क्षेत्र का धार्मिक महत्त्व था।

प्रचर्ष-मुनियों के अनेक आश्रम उत्तराखण्ड के वनी में स्थित थे। माना जाता है कि कई महान संतो ने इसी क्षेत्र मे तपस्था की थी।

महाभारत काल में उत्तराखण्ड

महाभारत के अनुसार पाण्डव युद्ध के बाद अपने पापो का पाथाच्चत करने के लिए हिमालय आये थे । आगे चलकर बद्रीनाथ और स्वर्गारोहणी की और प्रस्तान किया था।

स्वर्गारोहणी पर्वत उत्तराखण्ड के उत्तरकाशी

जिले में स्थित माना जाता है। और इसे पाण्डवो के अंतिम मार्ग से जोड़ा जाता है।

प्रऋषि-मुनियो की तपो भूमि

प्राचीन काल में उत्तराखण्ड अनेको महान ऋषियो की तपोभूमि रही है। इन्होने यहाँ तपस्या की है।

ऋषि-मुनियों की तपोभूमि

 

प्राचीन काल में उत्तराखण्ड अनेक महान ऋऋषियो की तपस्थली रहा। इनमे प्रमुख थे।

महर्षि व्यास, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि कण्व, महर्षि अगस्त्य, महर्षि पराशर इन्ही ऋऋषियो के कारण उत्तराखण्ड को तपोभूमि कहते हैं।

गंगा और यमुना का धार्मिक महत्त्व-

उत्तराखण्ड में दो महान नदियो का उद्गम होता है।

1.गंगा तथा

2.यमुना

भागीरथी नदी – भागीरथी नदी का उद्गम गंगोत्री ग्लेशियर (गोमुख) से होता है।

यमुना नदी- यमुना नदी का उद्गम यमुनोत्री से होता है।

इन दोनों नदियो का भारतीय संस्कृति मे अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान हैl

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